चुने लाख हों पत्थर , नहीं देखे जाते
राह में अँधेरे हों गर , नहीं देखे जाते
जलाया रातों में हमने ,बस एक दिया
चरागाँ बुझे हों अगर , नहीं देखे जाते
खाक हो जायेंगे हम , आ के सम्भालो हमको
इश्क़ में रहज़न-ओ-रहबर नहीं देखे जाते
बड़ी मुद्दत से जिनको देखा किया था हमने
उनके बदले हुए तेवर , नहीं देखे जाते
कभी होता था सभी ओर जहाँ चैनों सुकूँ
वहीँ जलते हुए मंजर , नहीं देखे जाते
इश्क़ में जिनके रहे थे , सभी ताउम्र फ़ना
उन्हीं पहलू में अब खंजर , नहीं देखे जाते !!
राह में अँधेरे हों गर , नहीं देखे जाते
जलाया रातों में हमने ,बस एक दिया
चरागाँ बुझे हों अगर , नहीं देखे जाते
खाक हो जायेंगे हम , आ के सम्भालो हमको
इश्क़ में रहज़न-ओ-रहबर नहीं देखे जाते
बड़ी मुद्दत से जिनको देखा किया था हमने
उनके बदले हुए तेवर , नहीं देखे जाते
कभी होता था सभी ओर जहाँ चैनों सुकूँ
वहीँ जलते हुए मंजर , नहीं देखे जाते
इश्क़ में जिनके रहे थे , सभी ताउम्र फ़ना
उन्हीं पहलू में अब खंजर , नहीं देखे जाते !!
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