कल ही पापा मम्मी उसे लेकर बाहर गए थे , बहुत खुश हुई थी वो कठपुतली का खेल देखकर ।
आज रात में एक बार फिर वो देख रही थी कठपुतली का खेल , बस उसके पात्र अलग थे । पापा मम्मी जीवन के कुछ कड़वे पल जी रहे थे और वो एक बार फिर खुश हो रही थी परदे के दूसरे ओर से ।
आज रात में एक बार फिर वो देख रही थी कठपुतली का खेल , बस उसके पात्र अलग थे । पापा मम्मी जीवन के कुछ कड़वे पल जी रहे थे और वो एक बार फिर खुश हो रही थी परदे के दूसरे ओर से ।
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