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Tuesday, June 9, 2015

राजनीति--

कितनी ही बार बापू ने समझाया था कि वो तेरा इस्तेमाल कर रहा है , लेकिन उसने हमेशा बापू को ही गलत समझा |
आज उसके घर पहुंचा ही था कि बैठक से आवाज़ सुनाई दी " अरे किसुनवा को थोड़ा इज़्ज़त दे देता हूँ इसका मतलब ये थोड़े ही है कि जात भूल गया हूँ उसका | यही तो राजनीति है , समझे " और ठहाकों का समवेत स्वर उसके कानों में पड़ा |
अब उसे लगने लगा कि लोग ज्यादा मत उड़ो किसे कहते हैं .

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