" अरे यार , तलाक़ क्यूँ नहीं दे देते उसको । इतनी परेशानियाँ झेल कर भी निभाए जा रहे हो "।
वो सोच में डूब गया , सच ही तो कह रहा है ये ।
" कहीं तुम समाज के चलते तो नहीं हिचक़ रहे , ये समाज भी कहीं किसी का भला करता है "।
अचानक उसके आँखों सामने बेटी का चेहरा आ गया ।
" खैर , समाज का तो ठीक कहा तुमने , लेकिन जब तुम भी बेटी के पिता बनोगे तो समझ जाओगे "।
वो सोच में डूब गया , सच ही तो कह रहा है ये ।
" कहीं तुम समाज के चलते तो नहीं हिचक़ रहे , ये समाज भी कहीं किसी का भला करता है "।
अचानक उसके आँखों सामने बेटी का चेहरा आ गया ।
" खैर , समाज का तो ठीक कहा तुमने , लेकिन जब तुम भी बेटी के पिता बनोगे तो समझ जाओगे "।
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