जिंदगी कैसे कहें , तेरे सवाल कितने हैं
आओ फिर से देखें , बाक़ी मलाल कितने हैं
गुज़र तो रही थी , अपनी ये पुरसुकूँ शामें
लगता है यूँ अब , सचमें बवाल कितने हैं
जब भी कहा , बस ग़लत ही कहा हमसे
सच के इन दिनों , आते ख़याल कितने हैं
आईना भी अब तो , मुँह झट से मोड़ लेता है
दिखता अब उसको , सच्चे ज़लाल कितने हैं !!
आओ फिर से देखें , बाक़ी मलाल कितने हैं
गुज़र तो रही थी , अपनी ये पुरसुकूँ शामें
लगता है यूँ अब , सचमें बवाल कितने हैं
जब भी कहा , बस ग़लत ही कहा हमसे
सच के इन दिनों , आते ख़याल कितने हैं
आईना भी अब तो , मुँह झट से मोड़ लेता है
दिखता अब उसको , सच्चे ज़लाल कितने हैं !!
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