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Thursday, December 10, 2015

जिजीविषा--

" अरे , उस ग्रह का तो चित्र ही कुछ अलग रंग का दिख रहा है अब, पहले तो बिलकुल भूरा भूरा दिखता था सब ", एक प्राणी ने चिल्लाकर कहा।
" हाँ, अब तो इसका रंग हरा हो गया है, कैसे ये चमत्कार हो गया " दूसरा प्राणी भी आश्चर्यचकित था उस ग्रह को देखते हुए।
इस ग्रह के सभी प्राणी भागते हुए अपने गुरु के द्वार पर पहुंचे और घबराये हुए शब्दों में उन्होंने सारा हाल सुना डाला।
" अब क्या होगा गुरुदेव, अब हमारा उस ग्रह पर बसने का स्वप्न कैसे पूरा होगा, अब तो लगता है वहाँ जीवन के लक्षण फिर पनप रहे हैं "।
" दरअसल उस ग्रह का जो मानव नामका दोपाया प्राणी है, वो हमारे समझ के बाहर है। हमें लगा था कि वो अपना विनाश करके ही मानेगा लेकिन उसी में से कुछ लोगों की जिजीविषा ने वापस हरियाली पैदा कर दी। अब हमें कुछ और सहस्त्र वर्ष इंतज़ार करना होगा वहाँ बसने के लिए ", गुरूजी ने गम्भीरता से कहा|
इस ग्रह के प्राणी हैरान परेशान अपने अपने कार्य में लग गए और गुरूजी वापस कुछ नयी तरकीब सोचने में व्यस्त हो गए।

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