घर की तरफ जाते हुए दिमाग भन्नाया हुआ था उसका, आज तो सीमा पार हो गयी। सहने की भी कोई सीमा होती है, अब और नहीं सहेगा और जैसे भी हो, बदला जरूर लेगा इस अपमान का। सोचते सोचते उसने मोबाइल निकाला और अपने उस दोस्त को फोन लगाया जिससे सामान्य हालात में वो बात भी नहीं करता।
" कुछ जरुरी काम है , तुम्हारी मदद चाहिए , कल बात करूँगा", कहकर उसने फोन जेब में रखा और कल की योजना उसके दिमाग में चलने लगी।
इसी उधेड़ बुन में कब घर पहुँच गया, पता ही नहीं चला उसको। घर में घुसते ही उसकाकुत्ता दौड़ कर आया और उसके हाथ को चाटते हुए उसके ऊपर चढ़ने लगा। बहुत बार उसने उसको हटाया लेकिन वो उसके आस पास ही घूमता रहा। आखिरकार वो सोफे पर बैठा और कुत्ता उसके गोद में चढ़कर उसके मुँह को चाटने का प्रयास करने लगा।
कुछ मिनटों में ही उसका गुस्सा काफ़ूर हो चुका था, अब उसका मन प्रसन्न था और उसके दिमाग में प्यार उमड़ रहा था। उसे अंदर से कुछ ग्लानि महसूस होने लगी और उसने फोन उठाया और अपने दोस्त को कल के काम को रद्द होने का मैसेज भेज दिया।
अब उसे बहुत हल्का महसूस ह रहा था, कुत्ता अभी भी उसके गोद में खेल रहा था।
" कुछ जरुरी काम है , तुम्हारी मदद चाहिए , कल बात करूँगा", कहकर उसने फोन जेब में रखा और कल की योजना उसके दिमाग में चलने लगी।
इसी उधेड़ बुन में कब घर पहुँच गया, पता ही नहीं चला उसको। घर में घुसते ही उसकाकुत्ता दौड़ कर आया और उसके हाथ को चाटते हुए उसके ऊपर चढ़ने लगा। बहुत बार उसने उसको हटाया लेकिन वो उसके आस पास ही घूमता रहा। आखिरकार वो सोफे पर बैठा और कुत्ता उसके गोद में चढ़कर उसके मुँह को चाटने का प्रयास करने लगा।
कुछ मिनटों में ही उसका गुस्सा काफ़ूर हो चुका था, अब उसका मन प्रसन्न था और उसके दिमाग में प्यार उमड़ रहा था। उसे अंदर से कुछ ग्लानि महसूस होने लगी और उसने फोन उठाया और अपने दोस्त को कल के काम को रद्द होने का मैसेज भेज दिया।
अब उसे बहुत हल्का महसूस ह रहा था, कुत्ता अभी भी उसके गोद में खेल रहा था।
No comments:
Post a Comment