खबर बहुत भयानक थी, लोग भूख के चलते कुछ भी खाने या कुछ नहीं खाने को मजबूर थे। चैनल प्रबन्धक ने उसे तुरंत वहाँ जाकर कुछ सनसनीखेज ख़बर लाने को कहा और उसके साथ कैमरा मैन और कुछ सहयोगी भी जाने को तैयार हो गए। सबने खाने पीने के लिए काफी सामान रख लिया था, वज़ह साफ़ थी कि पता नहीं वहां खाने को कुछ मिलेगा भी या नहीं।
जैसे जैसे उनकी कार उस गाँव के नज़दीक पहुँच रही थी, वैसे वैसे उनको सिर्फ सूनी, धूल उड़ाती सड़कें, सूखे खेत और कहीं कहीं कुछ कमज़ोर पशु नज़र आ रहे थे। गाँव पहुंचकर उन्होंने घर घर जाकर लोगों से भूख और सूखे के बारे में पूछना शुरू किया। जितना उसने सोचा था उससे कहीं बहुत ज्यादा भयावह स्थिति थी वहाँ की, गाँव में सिर्फ महिलाएं और बच्चे ही बचे थे। अधिकांश मर्द गाँव छोड़कर रोज़गार की तलाश में बाहर चले गए थे। गर्मी बहुत थी और वो बार बार लायी हुई मिनरल वाटर की बोतल खाली कर रही थी। लगभग तीन घंटे में उसने काफी लोगों से बातचीत की और एक बढ़िया स्टोरी तैयार थी। उसने फोन निकाला और हँसते हुए बॉस को भूख के सजीव चित्रण की स्टोरी के बारे में बताया। अब उन सब को भी भूख लग चुकी थी और उन्होंने एक पेड़ के नीचे चटाई बिछायी और खाने का सामान निकालकर बैठ गए।
अभी उसने खाने के लिए पहला कौर उठाया ही था कि उसकी नज़र थोड़ी दूर खड़े कुछ बच्चों पर पड़ी। उनका मुँह खुला हुआ था और लग रहा था जैसे वो सब उसके साथ साथ खाना खाने वाले थे। उसने एक कौर मुँह में डाला और देखा कि बच्चे भी उसके साथ मुँह चला रहे थे, मानो वो सब भी दूर से ही खाने का स्वाद लेने का प्रयास कर रहे थे। जिंदगी में पहली बार उसे खाना इतना मुश्किल लग रहा था, ऐसा लग रहा था जैसे वो उन बच्चों का निवाला छीन कर खा रही हो। एक बार और उसने उन बच्चों की तरफ देखा और फिर उसने अपना सारा खाने का सामान उठाया और बच्चों की तरफ चल दी।
बच्चों को पास बैठाकर उसने उन्हें खिलाना शुरू कर दिया| बच्चे इतनी प्रसन्नता से खाना खा रहे थे कि उसकी आत्मा भी तृप्त हो गयी। ये देखकर उसके बाकी साथी भी अब अपना खाना लेकर बच्चों की तरफ आ गए। एक तरफ बच्चे भर पेट खाना खा रहे थे , दूसरी तरफ ये सब उनके कैमरे में दर्ज हो रहा था। अब ये स्टोरी उसे पूरे समाज को दिखानी थी और बताना था कि ऐसे क्षेत्र में सिर्फ स्टोरी बनाने के लिए नहीं , बल्कि उन्हें मदद पहुँचाने के लिए जाने की जरुरत है। आज उसे पहली बार अपने प्रोफेशन पर गर्व हो रहा था और साथ ही साथ उसकी पूरी टीम को ज्यादा खाना और पैसा साथ नहीं लाने का अफ़सोस हो रहा था।
जैसे जैसे उनकी कार उस गाँव के नज़दीक पहुँच रही थी, वैसे वैसे उनको सिर्फ सूनी, धूल उड़ाती सड़कें, सूखे खेत और कहीं कहीं कुछ कमज़ोर पशु नज़र आ रहे थे। गाँव पहुंचकर उन्होंने घर घर जाकर लोगों से भूख और सूखे के बारे में पूछना शुरू किया। जितना उसने सोचा था उससे कहीं बहुत ज्यादा भयावह स्थिति थी वहाँ की, गाँव में सिर्फ महिलाएं और बच्चे ही बचे थे। अधिकांश मर्द गाँव छोड़कर रोज़गार की तलाश में बाहर चले गए थे। गर्मी बहुत थी और वो बार बार लायी हुई मिनरल वाटर की बोतल खाली कर रही थी। लगभग तीन घंटे में उसने काफी लोगों से बातचीत की और एक बढ़िया स्टोरी तैयार थी। उसने फोन निकाला और हँसते हुए बॉस को भूख के सजीव चित्रण की स्टोरी के बारे में बताया। अब उन सब को भी भूख लग चुकी थी और उन्होंने एक पेड़ के नीचे चटाई बिछायी और खाने का सामान निकालकर बैठ गए।
अभी उसने खाने के लिए पहला कौर उठाया ही था कि उसकी नज़र थोड़ी दूर खड़े कुछ बच्चों पर पड़ी। उनका मुँह खुला हुआ था और लग रहा था जैसे वो सब उसके साथ साथ खाना खाने वाले थे। उसने एक कौर मुँह में डाला और देखा कि बच्चे भी उसके साथ मुँह चला रहे थे, मानो वो सब भी दूर से ही खाने का स्वाद लेने का प्रयास कर रहे थे। जिंदगी में पहली बार उसे खाना इतना मुश्किल लग रहा था, ऐसा लग रहा था जैसे वो उन बच्चों का निवाला छीन कर खा रही हो। एक बार और उसने उन बच्चों की तरफ देखा और फिर उसने अपना सारा खाने का सामान उठाया और बच्चों की तरफ चल दी।
बच्चों को पास बैठाकर उसने उन्हें खिलाना शुरू कर दिया| बच्चे इतनी प्रसन्नता से खाना खा रहे थे कि उसकी आत्मा भी तृप्त हो गयी। ये देखकर उसके बाकी साथी भी अब अपना खाना लेकर बच्चों की तरफ आ गए। एक तरफ बच्चे भर पेट खाना खा रहे थे , दूसरी तरफ ये सब उनके कैमरे में दर्ज हो रहा था। अब ये स्टोरी उसे पूरे समाज को दिखानी थी और बताना था कि ऐसे क्षेत्र में सिर्फ स्टोरी बनाने के लिए नहीं , बल्कि उन्हें मदद पहुँचाने के लिए जाने की जरुरत है। आज उसे पहली बार अपने प्रोफेशन पर गर्व हो रहा था और साथ ही साथ उसकी पूरी टीम को ज्यादा खाना और पैसा साथ नहीं लाने का अफ़सोस हो रहा था।
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