अर्थ का अनर्थ कैसे हो सकता है , इसका एहसास मुझे भी हुआ है जिंदगी में । बात १९९३ की है , मैं उस समय करही , जो कि मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में एक गाँव है , में नौकरी कर रहा था । निमाड़ का क्षेत्र था और महाराष्ट्र के नज़दीक होने के चलते निमाड़ी के साथ साथ मराठी भी काफी प्रचलित थी उस तरफ । एक दिन मैं शाखा में रोजमर्रा के काम में लगा हुआ था तभी एक ग्राहक मेरे पास आया । उसका चेहरा थोड़ा उतरा हुआ था , जबकि सामान्यतया वो खुशमिज़ाज इंसान था । मैंने यूँ ही उत्सुकता वस पूछ लिया कि क्या हुआ ? उसने थोड़े उदास लहज़े में कहा ," मेरे पिताजी शांत हो गए "।
मुझे लगा कि शायद मैंने गलत सुन लिया इसलिए मैंने उससे कहा " आपके पिताजी शांत हो गए ?, तो उसने हाँ में सर हिला दिया । थोड़ी देर बाद वो तो चला गया लेकिन मैं उधेड़बुन में डूबा रहा । मैं सोच रहा था कि क्यों और कैसे शांत हो गए होंगे उसके पिताजी । मेरे शब्दकोश में शांत होने का मतलब था खामोश हो जाना , और कोई यूँ अचानक खामोश कैसे हो सकता है ।
इतने में शाखा का दफ्तरी मेरे पास आया और उसने कहा " अभी जो आदमी आया था आपके पास , उसके घर चलना है हमको "। मेरे कारण पूछने पर उसने भी वही बताया " उसके पिताजी शांत हो गए हैं न , इसीलिए जाना जरुरी है "। अब मुझसे रहा नहीं गया और मैं पूछ बैठा " अरे अगर उसके पिताजी शांत हो गए हैं तो हम लोग जाकर क्या करेंगे ?
उसने बड़े आश्चर्य से मुझे देखा और बोला " अरे ऐसे में तो जाते ही हैं सब लोग , इसलिए हमें भी जाना चाहिए "।
मैंने अब अपनी शंका व्यक्त कर ही दी उससे " अरे भाई , अगर उसके पिताजी चुप हो गए हैं तो हम लोग जाकर वहाँ क्या करेंगे "।
अब दफ्तरी को बात समझ में आई और उसने बड़ी गंभीरता से मुझे समझाया " अरे जनाब , शांत हो जाने का मतलब होता है गुजर जाना "। अब बात मेरी भी समझ में आई और मैं काफी देर तक हँसता रहा अपनी सोच पर । लेकिन मुझे अपने शब्दकोश के लिए एक नया शब्द मिल गया ।
मुझे लगा कि शायद मैंने गलत सुन लिया इसलिए मैंने उससे कहा " आपके पिताजी शांत हो गए ?, तो उसने हाँ में सर हिला दिया । थोड़ी देर बाद वो तो चला गया लेकिन मैं उधेड़बुन में डूबा रहा । मैं सोच रहा था कि क्यों और कैसे शांत हो गए होंगे उसके पिताजी । मेरे शब्दकोश में शांत होने का मतलब था खामोश हो जाना , और कोई यूँ अचानक खामोश कैसे हो सकता है ।
इतने में शाखा का दफ्तरी मेरे पास आया और उसने कहा " अभी जो आदमी आया था आपके पास , उसके घर चलना है हमको "। मेरे कारण पूछने पर उसने भी वही बताया " उसके पिताजी शांत हो गए हैं न , इसीलिए जाना जरुरी है "। अब मुझसे रहा नहीं गया और मैं पूछ बैठा " अरे अगर उसके पिताजी शांत हो गए हैं तो हम लोग जाकर क्या करेंगे ?
उसने बड़े आश्चर्य से मुझे देखा और बोला " अरे ऐसे में तो जाते ही हैं सब लोग , इसलिए हमें भी जाना चाहिए "।
मैंने अब अपनी शंका व्यक्त कर ही दी उससे " अरे भाई , अगर उसके पिताजी चुप हो गए हैं तो हम लोग जाकर वहाँ क्या करेंगे "।
अब दफ्तरी को बात समझ में आई और उसने बड़ी गंभीरता से मुझे समझाया " अरे जनाब , शांत हो जाने का मतलब होता है गुजर जाना "। अब बात मेरी भी समझ में आई और मैं काफी देर तक हँसता रहा अपनी सोच पर । लेकिन मुझे अपने शब्दकोश के लिए एक नया शब्द मिल गया ।
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