पूरी रात सो नहीं पायी थी वो, बहुत कठिन मोड़ पर ला खड़ा किया था ज़िन्दगी ने। बहुत सी जिम्मेदारियाँ थीं जिनका निर्वाह करना बाक़ी था और अपने संस्कार भी थे जिनसे दूर होना एक तरह से उसकी आत्मा की मौत थी। एक बार फिर मैसेज का टोन बजा फोन में और वो वर्तमान में आ गयी। हिम्मत नहीं पड़ रही थी फोन देखने की, उसे पता था कि मैसेज या तो बहन का होगा या बॉस का और दोनों ही स्थितियों के लिए वो निर्णय नहीं कर पायी थी।
कई दिनों से वो दोनों को टाल रही थी, जब भी बहन का मैसेज आता तो कमज़ोर पड़ने लगती थी। घर के एकलौते कमाऊ सदस्य होने के चलते उसकी पढ़ाई लिखाई की जिम्मेदारी उसको उठाना अपना कर्तव्य लगता लेकिन कहाँ से करे इंतज़ाम। बड़ी मुश्किल से थोड़े पैसे बचते थे जिसे वो बिला नागा घर भेज देती थी, लेकिन घर वालों को, या तो उसकी हालत का इल्म ही नहीं था, या वो यक़ीन नहीं करना चाहते थे। बॉस उसे व्यवहारिक बनने की सलाह देता और साथ ही साथ उसकी समस्याओं के हल का आश्वासन भी।
आख़िरकार उसने फोन उठाया, मैसेज बहन का ही था और दो दिन में ही पैसे भेजने के लिए लिखा था। वो फिर से कमज़ोर पड़ने लगी और उसे लगने लगा कि अब दोनों को ही हाँ बोलने के सिवा कोई चारा नहीं बचा था। अचानक उसकी नज़र सिरहाने रखी पिता के तस्वीर पर पड़ी और उसे उनके आखिरी समय में लिया गया संकल्प याद आ गया कि जिम्मेदारियाँ जरूर उठाना लेकिन अपने संस्कारों और इच्छाओं की कीमत पर नहीं।
उसने अपना पहला संकल्प पूरा करते हुए दोनों को हाँ का जवाब भेज दिया और फोन रखते हुए उसने पिता की तस्वीर उल्टी कर दी।
कई दिनों से वो दोनों को टाल रही थी, जब भी बहन का मैसेज आता तो कमज़ोर पड़ने लगती थी। घर के एकलौते कमाऊ सदस्य होने के चलते उसकी पढ़ाई लिखाई की जिम्मेदारी उसको उठाना अपना कर्तव्य लगता लेकिन कहाँ से करे इंतज़ाम। बड़ी मुश्किल से थोड़े पैसे बचते थे जिसे वो बिला नागा घर भेज देती थी, लेकिन घर वालों को, या तो उसकी हालत का इल्म ही नहीं था, या वो यक़ीन नहीं करना चाहते थे। बॉस उसे व्यवहारिक बनने की सलाह देता और साथ ही साथ उसकी समस्याओं के हल का आश्वासन भी।
आख़िरकार उसने फोन उठाया, मैसेज बहन का ही था और दो दिन में ही पैसे भेजने के लिए लिखा था। वो फिर से कमज़ोर पड़ने लगी और उसे लगने लगा कि अब दोनों को ही हाँ बोलने के सिवा कोई चारा नहीं बचा था। अचानक उसकी नज़र सिरहाने रखी पिता के तस्वीर पर पड़ी और उसे उनके आखिरी समय में लिया गया संकल्प याद आ गया कि जिम्मेदारियाँ जरूर उठाना लेकिन अपने संस्कारों और इच्छाओं की कीमत पर नहीं।
उसने अपना पहला संकल्प पूरा करते हुए दोनों को हाँ का जवाब भेज दिया और फोन रखते हुए उसने पिता की तस्वीर उल्टी कर दी।
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