कलम रुक गयी उसकी , क्या लिखे और क्यूँ लिखे | पहले ही तो कितना कुछ लिखा जा चुका है इस पर कि ईश्वर , अल्लाह , गॉड सब एक है , सारे धर्म तो एक ही शिक्षा देते हैं | सब लोग तो आपसी भाईचारा , प्रेम , सद्भाव वगैरह के बारे में ही लिखते हैं , फिर ऐसा क्यूँ होता है | क्यूँ एक छोटी सी चिंगारी इतनी ताक़तवर हो जाती है कि इंसान की समझ जल के राख हो जाती है |
अगर लिखने से ही सब कुछ ठीक हो जाता तो सब ठीक ही रहता न | नहीं , अब नहीं लिखना उसे | इंसान तरक्की कर रहा है , शिक्षित हो रहा है , लेकिन सारी शिक्षा क्यूँ धरी की धरी रह जाती है | और कितना बटेगा इंसान , किस किस आधार पर , कब तक ?
नहीं , अब वो और लिखेगा नहीं , वो कोशिश करेगा कि लोग जो लिखा है उसे पढ़ें और समझें | वो लोगों को बताएगा कि धर्म इंसान की बेहतरी के लिए हैं , बर्बादी के लिए नहीं | ये धरती प्रेम से जन्नत बन सकती है , नफरत से नहीं |
और जिस दिन लोग ये समझने लगेंगे , उस दिन वो लिखेगा , सबकी खुशहाली और सलामती की दुआ |
अगर लिखने से ही सब कुछ ठीक हो जाता तो सब ठीक ही रहता न | नहीं , अब नहीं लिखना उसे | इंसान तरक्की कर रहा है , शिक्षित हो रहा है , लेकिन सारी शिक्षा क्यूँ धरी की धरी रह जाती है | और कितना बटेगा इंसान , किस किस आधार पर , कब तक ?
नहीं , अब वो और लिखेगा नहीं , वो कोशिश करेगा कि लोग जो लिखा है उसे पढ़ें और समझें | वो लोगों को बताएगा कि धर्म इंसान की बेहतरी के लिए हैं , बर्बादी के लिए नहीं | ये धरती प्रेम से जन्नत बन सकती है , नफरत से नहीं |
और जिस दिन लोग ये समझने लगेंगे , उस दिन वो लिखेगा , सबकी खुशहाली और सलामती की दुआ |
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