माली बड़े जतन से पौधों को सींच रहा था और उसके चेहरे पर एक सुकून की रेखा खिंची हुई थी | इंसान होकर पौधों से इतना लगाव , शायद पेशागत , शायद जीवन का स्पंदन महसूस करने की शक्ति या कुछ और |
छोटा भी वहीँ खेल रहा था , उसकी माँ के चेहरे पर भी वही सुकून दिख रहा था | घर की याद आ गयी , कितने महीने हो गए हैं अपने गांव गए | शायद माँ बाप ने भी ऐसे ही सींचा होगा बचपन में हमें |
अचानक माली ने एक सूखा पौधा उखाड़ा | मन में कहीं चुभा कुछ , छोटा वैसे ही खेल रहा था और उसकी माँ वैसे ही खोयी हुई थी उसमें | लेकिन अब गांव जाने का संकल्प पक्का हो गया था |
छोटा भी वहीँ खेल रहा था , उसकी माँ के चेहरे पर भी वही सुकून दिख रहा था | घर की याद आ गयी , कितने महीने हो गए हैं अपने गांव गए | शायद माँ बाप ने भी ऐसे ही सींचा होगा बचपन में हमें |
अचानक माली ने एक सूखा पौधा उखाड़ा | मन में कहीं चुभा कुछ , छोटा वैसे ही खेल रहा था और उसकी माँ वैसे ही खोयी हुई थी उसमें | लेकिन अब गांव जाने का संकल्प पक्का हो गया था |
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