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Saturday, September 20, 2014

मदद--

एक वाकया याद आता है मुग़लसराय का जो कोयले और रेलवे यार्ड के लिए मशहूर है और वहां रेल का डी आर एम ऑफिस भी है | रेलवे के बहुत सारे कर्मचारियों के वेतन का खाता हमारी शाखा में था और महीने के करीब १० दिन बहुत भीड़ भाड़ रहती थी | कभी कभी तो पूरा दिन ही सिर्फ वेतन के भुगतान में निकल जाता था लेकिन लोग संतुष्ट थे |
एक उच्चाधिकारी के पिताजी का अकस्मात् निधन हो गया था और उनको तुरंत अपने घर जाना था | वे लखनऊ में थे और उनको ट्रेन से घर जाना था लेकिन ट्रेन में कोई सीट उपलब्ध नहीं थी | रात के करीब १० बजे ये सूचना मिली की वो बनारस कार से आ रहे हैं और मुग़लसराय से उनको सुबह ८ बजे ट्रेन पकड़नी थी | इतनी रात को कोई सूरत नज़र नहीं आ रही थी रिजर्वेशन दिलाने की , लेकिन फिर भी एक टी सी से बात हुई सुबह सुबह और अपने उच्चाधिकारी को लेकर मैं सुबह करीब ७ बजे प्लेटफार्म पहुँच गया | वहां पर उस टी सी से मुलाक़ात हुई , उसने हमें अपने ऑफिस में बैठा दिया और बोला कि मैं पूरी कोशिश करता हूँ कि एक सीट मिल जाये | कोई और रास्ता नहीं था इसलिए हम लोग बैठ गए | थोड़ी देर बाद किसी ने नमस्ते किया और पूछा कि यहाँ क्यों बैठे हैं | वो भी टी सी था , जैसे ही उसे पता चला , वो भी लग गया सीट के इंतज़ाम में | अगले आधे घंटे में करीब १० टी सी आये और कमोबेश सभी ने वही सवाल पूछा और सब सीट के लिए लग गए | पता नहीं कितने लोगों ने चाय वगैरह के लिए भी पूछा , लेकिन उस समय तो एकलौती चिंता सीट की थी |
थोड़ी देर बाद एक टी सी आया जिसे उसी ट्रेन से जाना था | उसने मुझसे पूछा कि आपको एक ही सीट चाहिए न | मैंने हाँ में उत्तर दिया तो उसने फिर कहा कि करीब दस लोग मुझसे कह चुके हैं कि हर हालत में एक सीट चाहिए तो मैंने सोचा कि देख लूँ कौन है जिसके लिए इतने लोग सिफारिश कर रहे हैं | आप इत्मीनान रखिये , आपको सीट मिल जाएगी , अब और किसी से मत कहियेगा | मैंने झेंपते हुए कहा कि लोग मुझसे पूछ रहे हैं इसलिए बताना पड़ रहा है |
ट्रैन आई और सारे टी सी आ गए लिवाने | उनको सीट पे बैठाकर जब मैं वापस आ रहा था तो उन्होंने पूछा " तुम इनके लिए क्या करते हो जो आज सारे मदद के लिए खड़े थे | मैंने कहा कि बस इतनी कोशिश करता हूँ कि जो भी हमारी शाखा में आये वो संतुष्ट होकर लौटे " |
उस दिन मुझे विश्वास हो गया कि दूसरों के लिए की गयी मदद हमारे पास किसी न किसी रूप में वापस आ ही जाती है |

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