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Friday, September 12, 2014

अख़बार--

साहब बहुत चिंतित थे , वजह थी कल की विजिट | कल एक कंपनी के सर्वोच्च अधिकारी मिलने आ रहे थे |
अब इतने बड़े अधिकारी आ रहे हैं तो खर्च भी होगा | निहायत कंजूस थे , खर्च के नाम पर प्राण सूख जाते थे | खैर अगले दिन वो उच्चाधिकारी आये और किसी तरह न्यूनतम खर्च में निपटा दिया उनको | लेकिन जाते जाते एक गड़बड़ हो गयी , उस दिन का अख़बार वो लेते गए | 
करीब दो घंटे बाद उसने अपने अधीनस्थ को बुलाया और कहा " उस कंपनी के मैनेजर को बोल दो कि आज का अख़बार खरीद कर दे दे " | अधीनस्थ ने अपने पैसे से अख़बार ख़रीदा और साहब को दे दिया , अपनी कंपनी की इज़्ज़त भी बची और साहब का तनाव भी निकल गया |

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