पता नहीं कौन सा रिश्ता था उनके बीच , जब भी वो जाता , ऑंखें बहने लगती |
दोस्त थे दोनों , उम्र में थोड़ा अंतर था , फिर समय के साथ दोस्ती का रिश्ता भाईयों सा हो गया |
दोनों दो शहरों में रहते थे लेकिन महीने दो महीने में एक दूसरे से मिलते जरूर थे |
इस बार जब छोटा जाने लगा तो उसने बड़े के पैर छुए | अब तो ये रिश्ता पिता पुत्र जैसा हो गया था , शायद बढ़ती उम्र का असर था | और जब वो बस में बैठ कर हाँथ हिला रहा था तो बड़ा अपनी ऑंखें पोंछ रहा था |
दोस्त थे दोनों , उम्र में थोड़ा अंतर था , फिर समय के साथ दोस्ती का रिश्ता भाईयों सा हो गया |
दोनों दो शहरों में रहते थे लेकिन महीने दो महीने में एक दूसरे से मिलते जरूर थे |
इस बार जब छोटा जाने लगा तो उसने बड़े के पैर छुए | अब तो ये रिश्ता पिता पुत्र जैसा हो गया था , शायद बढ़ती उम्र का असर था | और जब वो बस में बैठ कर हाँथ हिला रहा था तो बड़ा अपनी ऑंखें पोंछ रहा था |
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