एक और वाकया याद आता है बी एच यू का | दरअसल नींद की शुरू से ही बीमारी रही है मुझे | बहुत धनी था मैं इसमें और शायद पढ़ाई के दिनों में तो कुछ ज्यादा ही प्यारी हो जाती थी ये | ग्रेजुएशन में सेमेस्टर में दो परीक्षाएं होती थीं और और अधिकांशतयाः पढ़ाई परीक्षा की रात में ही होती थी | मैं पूरी रात जग के पढ़ता था और दिन में सो लेता था , क्योंकि कोई और विकल्प नहीं था | तमाम लड़के इस बात को जानते थे और मेरे कमरे में लगभग रोज़ १५ से २० लोग अपना जगाने का समय लिखा जाते थे | मैं , जैसे जैसे समय मिलता , लोगों को जगा देता था | कुछ लड़के तो यहाँ तक कहते कि जब तक मैं उठ के बाहर निकल कर मुंह धो के न आ जाऊँ , तब तक मत जाना | एक बार एक हादसा हो गया था , मैंने एक लड़के को जगाया , वो उठा और बोला ठीक है जाओ और मैं चला आया | सुबह सुबह वो मुझे गलियां देने लगा कि तुमने मुझे जगाया नहीं | मैंने सफाई दी कि तुम्हे जगाया तो था और तुम बोले कि ठीक है अब जाओ , तो वो अपना सर धुनने लगा कि मैं तो वापस सो गया था |
खैर , मेरा रूम पार्टनर मेरे रात भर जागने से परेशान रहता था , लेकिन क्या करे | लेकिन उसे कही न कहीं ये भरोसा भी होने लगा था कि मैं बहुत कम सोता हूँ | ऐसे ही एक दिन बातों बातों में उसने मुझसे शर्त लगायी कि देखतें हैं कौन ज्यादा सोता है | मैंने उसे कहा भी कि तुम मेरा मुक़ाबला नहीं कर पाओगे लेकिन वो निश्चिंत था कि वो ही जीतेगा | खैर , शनिवार को परीक्षा ख़त्म हो रही थी और उसी रात को हमारा मुक़ाबला होना था | अपनी आदतानुसार मैं शुक्रवार रात भर जगा रहा , सुबह परीक्षा दी और दिन में सोने का कार्यक्रम मुल्तवी कर दिया | उधर मेरा प्रतिद्वंदी रात में फिल्म देखने चला गया और मैं १० बजे खाना खा के सो गया | जाड़े का समय था और मेरी आदत थी रज़ाई से मुंह ढँक कर सोने की | करीब रात के साढ़े बारह बजे वो वापस आया और दरवाजा खटखटाने लगा | करीब १० मिनट बाद भी जब कोई आहट नहीं हुई तो वो मेरा नाम लेके जोर जोर से चिल्लाने लगा और दरवाजा पीटने लगा | धीरे धीरे उस तल के बहुत सारे लड़के जग गए और अपने कमरों से निकल कर मेरे कमरे के सामने आ गए | जब लोगों ने पीटने और चिल्लाने में अपनी सारी ताक़त लगा ली तो उनके सामने एक ही विकल्प बचा था कि दरवाज़ा तोड़ दिया जाए | तभी एक लड़के ने कहा कि ऊपर का रोशनदान खुला है , उससे पानी गिराते हैं और फिर लोगों ने मेज लगाकर रोशनदान से पानी गिराना शुरू किया | पानी जब रज़ाई से छनकर मुंह पर आया तो ठण्ड से आँख खुल गयी | मैंने जैसे ही रज़ाई हटाई , वैसे ही दरवाजे पर ज़ोर से दस्तक हुई और लोगों कि चिल्लाने की आवाज़ भी आई | मैंने हड़बड़ाकर दरवाजा खोला और दरवाज़ा खुलते ही एक साथ कई लड़के अंदर आ गए | गालियों की बौछार शुरू थी और मैं हक्का बक्का देख रहा था | कुछ देर में सब चले गए और मेरे पार्टनर ने मुझसे पूछा " तुम सच में सोये थे , हम तो डर गए थे कि कहीं कुछ और तो नहीं हो गया था " | उसके बाद उसने कहा कि प्रभु , अपने चरण दिखाओ , तुमसे सोने में जीतना तो दूर , प्रतिस्पर्धा भी नहीं कर सकता मैं | अगले दिन सुबह मेस में नाश्ते के समय तमाम उंगलियां मेरी तरफ दिखाई जा रहीं थी कि वही लड़का है जो कल सो गया था |
लेकिन हक़ीक़त यही थी कि मैं सचमुच सो गया था |
खैर , मेरा रूम पार्टनर मेरे रात भर जागने से परेशान रहता था , लेकिन क्या करे | लेकिन उसे कही न कहीं ये भरोसा भी होने लगा था कि मैं बहुत कम सोता हूँ | ऐसे ही एक दिन बातों बातों में उसने मुझसे शर्त लगायी कि देखतें हैं कौन ज्यादा सोता है | मैंने उसे कहा भी कि तुम मेरा मुक़ाबला नहीं कर पाओगे लेकिन वो निश्चिंत था कि वो ही जीतेगा | खैर , शनिवार को परीक्षा ख़त्म हो रही थी और उसी रात को हमारा मुक़ाबला होना था | अपनी आदतानुसार मैं शुक्रवार रात भर जगा रहा , सुबह परीक्षा दी और दिन में सोने का कार्यक्रम मुल्तवी कर दिया | उधर मेरा प्रतिद्वंदी रात में फिल्म देखने चला गया और मैं १० बजे खाना खा के सो गया | जाड़े का समय था और मेरी आदत थी रज़ाई से मुंह ढँक कर सोने की | करीब रात के साढ़े बारह बजे वो वापस आया और दरवाजा खटखटाने लगा | करीब १० मिनट बाद भी जब कोई आहट नहीं हुई तो वो मेरा नाम लेके जोर जोर से चिल्लाने लगा और दरवाजा पीटने लगा | धीरे धीरे उस तल के बहुत सारे लड़के जग गए और अपने कमरों से निकल कर मेरे कमरे के सामने आ गए | जब लोगों ने पीटने और चिल्लाने में अपनी सारी ताक़त लगा ली तो उनके सामने एक ही विकल्प बचा था कि दरवाज़ा तोड़ दिया जाए | तभी एक लड़के ने कहा कि ऊपर का रोशनदान खुला है , उससे पानी गिराते हैं और फिर लोगों ने मेज लगाकर रोशनदान से पानी गिराना शुरू किया | पानी जब रज़ाई से छनकर मुंह पर आया तो ठण्ड से आँख खुल गयी | मैंने जैसे ही रज़ाई हटाई , वैसे ही दरवाजे पर ज़ोर से दस्तक हुई और लोगों कि चिल्लाने की आवाज़ भी आई | मैंने हड़बड़ाकर दरवाजा खोला और दरवाज़ा खुलते ही एक साथ कई लड़के अंदर आ गए | गालियों की बौछार शुरू थी और मैं हक्का बक्का देख रहा था | कुछ देर में सब चले गए और मेरे पार्टनर ने मुझसे पूछा " तुम सच में सोये थे , हम तो डर गए थे कि कहीं कुछ और तो नहीं हो गया था " | उसके बाद उसने कहा कि प्रभु , अपने चरण दिखाओ , तुमसे सोने में जीतना तो दूर , प्रतिस्पर्धा भी नहीं कर सकता मैं | अगले दिन सुबह मेस में नाश्ते के समय तमाम उंगलियां मेरी तरफ दिखाई जा रहीं थी कि वही लड़का है जो कल सो गया था |
लेकिन हक़ीक़त यही थी कि मैं सचमुच सो गया था |
No comments:
Post a Comment