वैसे तो मैं कभी भी ऐसा छात्र नहीं रहा जिसपर गुरुजन गर्व कर सकें , लेकिन कई शिक्षकों ने बहुत प्रभावित किया | कुछ बहुत अच्छी तो कुछ कड़वी यादें हैं छात्र जीवन की , लेकिन आज एक गुरु के बारें में बताऊंगा जिन्होंने प्रभावित किया |
बी एच यू की बात है | हॉस्टल में रहने के कारण देर तक जगना और फिर देर तक सोना | सुबह की प्रैक्टिकल की क्लास अक्सर छूट जाती थी | एक विषय था प्लांट पैथोलॉजी का जिसके प्रैक्टिकल में भी गायब रहता था | मिड सेम की परीक्षा हुई , नंबर उन्होंने अपने प्रैक्टिकल क्लास में ही दिखाया | मैं गया नहीं इसलिए नंबर पता नहीं चला | अब अगले प्रैक्टिकल में जाना मज़बूरी बन गया था | खैर मैं पहुंचा और उनसे अपने नंबर के बारे में पूछा | बड़ी हिकारत भरी नज़र से देखते हुए उन्होंने कॉपी निकाली , लेकिन नंबर देखते ही उनका चेहरा बदल गया | दरअसल मेरे सबसे ज्यादा नंबर थे | अब उन्होंने मेरी तारीफ़ करनी शुरू कर दी कि बहुत सटीक जवाब दिए हैं तुमने , एकदम संक्षिप्त | मेरी आदत रही है कम से कम में लिखने की और मेरी जान में जान आई | लेकिन अब तो फंस गए थे क्योंकि आगे से हर प्रैक्टिकल में जाना मज़बूरी बन गया |
खैर एंड सेम की परीक्षा आई | मैं अपनी आदत के अनुसार मैं फ़टाफ़ट उत्तर लिख कर बाहर निकल गया | चूँकि समय बचा हुआ था इसलिए क्लास के बाहर लॉन में बैठा हुआ था तभी एक लड़का आया और बोला कि मेरा तो प्रश्न छूट गया | मैंने पूछा कि क्यों तो वो बोला कि अरे पेपर के पीछे भी प्रश्न थे जो मैं देख ही नहीं पाया | अब मेरे प्राण सुख गए क्योंकि मैंने भी पीछे नहीं देखा था और मेरे भी वो प्रश्न छूट गए | मैं भाग कर वापस क्लास में गया लेकिन अब लिखने की इज़ाज़त नहीं थी | तब तक टीचर भी आ गए थे और मुझे देखते ही उनके मुंह से निकला " अरे तुम्हारा भी प्रश्न छूट गया " | मैंने बुझे मन से हामी भर दी | अब मुझसे ज्यादा वो परेशान दिखने लगे और बगल में खड़े टीचर से मेरे बारे में बताने लगे | थोड़ी देर बाद उन्होंने सांत्वना दी कि कोई बात नहीं , प्रैक्टिकल में मेहनत करना , सब ठीक हो जाएगा |
खैर प्रैक्टिकल कैसा हुआ , मैं नहीं कह सकता लेकिन उन्होंने मुझे ग्रेड जरूर दे दिया | उसके बाद भी जब तक मैं वहां था , मैं उनसे मिलता रहा और उनके प्रति मेरे मन में आज भी श्रद्धा है क्यूंकि उन्होंने अपने विश्वास को गलत साबित नहीं होने दिया | वो शिक्षक थे श्री डी सी पंत |
बी एच यू की बात है | हॉस्टल में रहने के कारण देर तक जगना और फिर देर तक सोना | सुबह की प्रैक्टिकल की क्लास अक्सर छूट जाती थी | एक विषय था प्लांट पैथोलॉजी का जिसके प्रैक्टिकल में भी गायब रहता था | मिड सेम की परीक्षा हुई , नंबर उन्होंने अपने प्रैक्टिकल क्लास में ही दिखाया | मैं गया नहीं इसलिए नंबर पता नहीं चला | अब अगले प्रैक्टिकल में जाना मज़बूरी बन गया था | खैर मैं पहुंचा और उनसे अपने नंबर के बारे में पूछा | बड़ी हिकारत भरी नज़र से देखते हुए उन्होंने कॉपी निकाली , लेकिन नंबर देखते ही उनका चेहरा बदल गया | दरअसल मेरे सबसे ज्यादा नंबर थे | अब उन्होंने मेरी तारीफ़ करनी शुरू कर दी कि बहुत सटीक जवाब दिए हैं तुमने , एकदम संक्षिप्त | मेरी आदत रही है कम से कम में लिखने की और मेरी जान में जान आई | लेकिन अब तो फंस गए थे क्योंकि आगे से हर प्रैक्टिकल में जाना मज़बूरी बन गया |
खैर एंड सेम की परीक्षा आई | मैं अपनी आदत के अनुसार मैं फ़टाफ़ट उत्तर लिख कर बाहर निकल गया | चूँकि समय बचा हुआ था इसलिए क्लास के बाहर लॉन में बैठा हुआ था तभी एक लड़का आया और बोला कि मेरा तो प्रश्न छूट गया | मैंने पूछा कि क्यों तो वो बोला कि अरे पेपर के पीछे भी प्रश्न थे जो मैं देख ही नहीं पाया | अब मेरे प्राण सुख गए क्योंकि मैंने भी पीछे नहीं देखा था और मेरे भी वो प्रश्न छूट गए | मैं भाग कर वापस क्लास में गया लेकिन अब लिखने की इज़ाज़त नहीं थी | तब तक टीचर भी आ गए थे और मुझे देखते ही उनके मुंह से निकला " अरे तुम्हारा भी प्रश्न छूट गया " | मैंने बुझे मन से हामी भर दी | अब मुझसे ज्यादा वो परेशान दिखने लगे और बगल में खड़े टीचर से मेरे बारे में बताने लगे | थोड़ी देर बाद उन्होंने सांत्वना दी कि कोई बात नहीं , प्रैक्टिकल में मेहनत करना , सब ठीक हो जाएगा |
खैर प्रैक्टिकल कैसा हुआ , मैं नहीं कह सकता लेकिन उन्होंने मुझे ग्रेड जरूर दे दिया | उसके बाद भी जब तक मैं वहां था , मैं उनसे मिलता रहा और उनके प्रति मेरे मन में आज भी श्रद्धा है क्यूंकि उन्होंने अपने विश्वास को गलत साबित नहीं होने दिया | वो शिक्षक थे श्री डी सी पंत |
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