पूरी रात लगा रहा वो माँ की मूर्ति को पूरा करने में | अब सिर्फ रंग भरना बाकी था | थकान हावी हो रही थी लेकिन सुबह से पहले हर हाल में इसे पूर्ण करना था |
सुबह उसकी पत्नी ने उसे झगझोर कर जगाया " ये क्या किया तुमने , ऑंखें यूँ ही छोड़ दी , क्या माँ की ऑंखें नहीं खुलेंगी " |
उसने उनींदे ही जवाब दिया " आजकल सचमुच खुलती हैं क्या माँ की ऑंखें " , और वापस सो गया |
सुबह उसकी पत्नी ने उसे झगझोर कर जगाया " ये क्या किया तुमने , ऑंखें यूँ ही छोड़ दी , क्या माँ की ऑंखें नहीं खुलेंगी " |
उसने उनींदे ही जवाब दिया " आजकल सचमुच खुलती हैं क्या माँ की ऑंखें " , और वापस सो गया |
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