" नेकी करो और भूल जाओ " इस कहावत को मानने वाले बड़े सुखी रहते हैं और उनको जिंदगी में कभी कभी बड़े सुखद आश्चर्य मिलते हैं | शायद २००१ की बात है , मैं आजमगढ़ में नियुक्त था | नयी शाखा थी और काफी सारे परिचित लोग भी थे उस शहर में | एक रिश्तेदार के ससुराल में शादी तंय हो गयी थी और उनको तिलक के लिए पैसे देने थे लड़के वालों को | पैसा एफ डी के रूप में मऊ के बैंक आफ इंडिया में रखा हुआ था और वो दो नामों से था | एक नाम जिसका था वो उस वक़्त किसी और शहर में था और उसके आने का समय निश्चित नहीं था | पैसा तुरंत चाहिए था लेकिन बैंक वालों ने बिना दोनों के हस्ताक्षर किये पैसे देने से इंकार कर दिया ( नियमतः वो सही थे ) |
वो रिश्तेदार तुरंत मेरे पास आये की किसी भी तरह से मुझे पैसा दिलवा दीजिये नहीं तो शादी में दिक्कत आ सकती है | उन्होंने भरोसा दिलाया कि जैसे ही दूसरे व्यक्ति आएंगे , उनके हस्ताक्षर करवा देंगे | मैंने मऊ शाखा में बात की , और उन्होंने मेरे लिखित आश्वासन पर पैसा दे दिया | बात आई गयी हो गयी , शादी भी हो गयी और मैं इन सब बातों को भूल गया |
लगभग तीन वर्ष पश्चात जब मेरी नियुक्ति मुगलसराय में थी , मेरे एक परिचित जो पुलिस विभाग में बड़ी पोस्ट पर थे ( जिनकी मदद से कुछ बिज़नेस लाने का प्रयास कर रहा था ) से मैं मिलने गया था | उनके ऑफिस में बैठ कर हम चाय पी रहे थे तभी एक नौजवान पुलिस अफसर आया और किनारे बैठ गया | मेरा परिचय हुआ और फिर मैं चाय पीने में मशगूल हो गया | वो नौजवान अफसर मुझे लगातार देखे जा रहा था , जो मुझे भी महसूस हो रहा था | आखिरकार उससे नहीं रहा गया तो वो मुझसे पूछने लगा की आप यहाँ से पहले कहाँ थे | मैंने बताया तो फिर पूछा कि उसके पहले कहाँ थे आप तो मैंने बताया कि आजमगढ़ | ये सुनते ही उन्होंने कहा कि आप ने मुझे नहीं पहचाना | मेरे इंकार करने पर उन्होंने बताया कि मेरी बहन कि शादी थी और आपके चलते ही वो पैसा समय पर मिल गया था | सचमुच मैंने उस अफसर को नहीं पहचाना लेकिन याद आ गया |
वो दिन , और आज का दिन , हम लोग बेहद अच्छे दोस्त हैं | आज उनके जन्मदिन पर अचानक ये सब याद आ गया | जन्मदिन मुबारक प्रिय मित्र |
वो रिश्तेदार तुरंत मेरे पास आये की किसी भी तरह से मुझे पैसा दिलवा दीजिये नहीं तो शादी में दिक्कत आ सकती है | उन्होंने भरोसा दिलाया कि जैसे ही दूसरे व्यक्ति आएंगे , उनके हस्ताक्षर करवा देंगे | मैंने मऊ शाखा में बात की , और उन्होंने मेरे लिखित आश्वासन पर पैसा दे दिया | बात आई गयी हो गयी , शादी भी हो गयी और मैं इन सब बातों को भूल गया |
लगभग तीन वर्ष पश्चात जब मेरी नियुक्ति मुगलसराय में थी , मेरे एक परिचित जो पुलिस विभाग में बड़ी पोस्ट पर थे ( जिनकी मदद से कुछ बिज़नेस लाने का प्रयास कर रहा था ) से मैं मिलने गया था | उनके ऑफिस में बैठ कर हम चाय पी रहे थे तभी एक नौजवान पुलिस अफसर आया और किनारे बैठ गया | मेरा परिचय हुआ और फिर मैं चाय पीने में मशगूल हो गया | वो नौजवान अफसर मुझे लगातार देखे जा रहा था , जो मुझे भी महसूस हो रहा था | आखिरकार उससे नहीं रहा गया तो वो मुझसे पूछने लगा की आप यहाँ से पहले कहाँ थे | मैंने बताया तो फिर पूछा कि उसके पहले कहाँ थे आप तो मैंने बताया कि आजमगढ़ | ये सुनते ही उन्होंने कहा कि आप ने मुझे नहीं पहचाना | मेरे इंकार करने पर उन्होंने बताया कि मेरी बहन कि शादी थी और आपके चलते ही वो पैसा समय पर मिल गया था | सचमुच मैंने उस अफसर को नहीं पहचाना लेकिन याद आ गया |
वो दिन , और आज का दिन , हम लोग बेहद अच्छे दोस्त हैं | आज उनके जन्मदिन पर अचानक ये सब याद आ गया | जन्मदिन मुबारक प्रिय मित्र |
No comments:
Post a Comment