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Saturday, April 19, 2014

अन्धविश्वास

मैं जा रहा हूँ , अजय के घर होते हुए जाऊंगा परीक्षा देने | ये कहते हुए मैंने अपना बैग उठाया और घर के बाहर निकल पड़ा | भैया ने भी हाथ हिलाकर विदा किया और शायद मन ही मन मेरे परीक्षा के अच्छे होने की कामना की | मैं पैदल चलते हुए अजय के घर पहुंचा | अजय भी तैयार था चलने के लिए और जैसे ही मैंने आवाज दी , वो घर से निकलने लगा | तभी उसकी माँ ने आवाज लगायी , अरे बेटा रुको , जरा ये दही गुड़ तो खा लो , फिर जाना परीक्षा देने , और फिर उसे एक कटोरी में दही गुड़ दिया खाने के लिए |
अजय मेरा बहुत अच्छा दोस्त था , हम दोनों रोज स्कूल साथ जाते थे और साथ ही वापस आते थे | लेकिन हम दोनों में एक बड़ा अंतर था , उसका मन पढ़ने में बिलकुल नहीं लगता था और किसी तरह वो पास हो जाता था | लेकिन हर बार परीक्षा के समय उसकी माँ उसे दही गुड़ जरूर खिलाती थीं | वो उनके मन का विश्वास , या यूँ कहें कि अन्धविश्वास था कि दही गुड़ खाने से बेटे की परीक्षा अच्छी होगी |

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