सामाजिक सरोकार तो अब बचे ही नहीं , बस खुदगर्जी ही है आजकल | मन बड़ा खट्टा हो गया मेरा , भार्गवजी बता रहे थे तो मैंने पूछ लिया कि क्या हो गया | बड़े दुखी मन से बोले , आपको शायद पता नहीं , मेरे पड़ोस में एक नए दम्पति आये हैं रहने के लिए | मैंने सोचा कि चलो उनसे परिचय भी कर लें और पूछ भी लें अगर किसी चीज कि जरुरत हो तो | लेकिन क्या बताएं साहब , उन लोगों ने तो बात करना ही मुनासिब नहीं समझा , दरवाजे से ही नो थैंक्स कह कर टरका दिया |
क्या कीजियेगा भार्गव साहब , आजकल लोग नहीं चाहते कि दूसरे उनके मामलों में दखल दें | अब सारे आप की तरह सामाजिक तो नहीं होते न | भार्गव साहब भुनभुनाते हुए जा रहे थे और मैं सोच रहा था कि आज की पीढ़ी में क्या सचमुच सामाजिक सरोकार नहीं बचे हैं |
क्या कीजियेगा भार्गव साहब , आजकल लोग नहीं चाहते कि दूसरे उनके मामलों में दखल दें | अब सारे आप की तरह सामाजिक तो नहीं होते न | भार्गव साहब भुनभुनाते हुए जा रहे थे और मैं सोच रहा था कि आज की पीढ़ी में क्या सचमुच सामाजिक सरोकार नहीं बचे हैं |
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