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Saturday, April 19, 2014

अपनापन

कहाँ के रहने वाले हो भाई , टैक्सी में बैठने के बाद साकेत ने ड्राईवर से पूछा | पूछने के दो मकसद थे , एक तो अपने एरिया का निकला तो शायद सही रास्ते ले जाये और जल्दी पहुँचा दे और दूसरा किराया भी कम ले | नए और अनजान शहर में वैसे ही तमाम तनाव होते हैं कि ठगे न जाएँ , सही समय पे पहुँच जाएँ और अगर किसी साक्षात्कार के लिए आये हैं तो फिर तो तनाव ही तनाव | टैक्सी वाले ने बताया कि यू.पी. के हैं तो अगला सवाल कि कौन से जिला के हो | उसके जवाब को सुनते ही साकेत बड़े ही अपनेपन से बोला "अरे हम भी वहीं के हैं " और फिर इत्मीनान से बैठ गया | टैक्सी वाले ने भी कहा कि चिंता मत करो भैया , हम आपको एकदम शॉर्टकट ले चलते हैं | गंतव्य पर पहुँच कर साकेत ने किराया पूछा और बताये किराये से 50 रूपया कम देते हुए बोला "भैया हम से तो ज्यादा मत लो "| पैसे गिनते हुए टैक्सी वाला सोच रहा था कि ये अपनापन उसे कब तक नुकसान पहुँचाएगा |

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