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Saturday, April 19, 2014

मुखौटे

आज के कार्यक्रम में आपको जाना है , याद है न | हाँ भाई , याद है , ये राजनैतिक मज़बूरी जो न करवाये | बड़े उखड़े लहजे में उन्होंने कहा और नाश्ते में लग गए | खैर शाम को सभास्थल पर पहुचे और मंच पे विराजमान हो गए | सामने मेज पर एक लड़के ने पानी और कुछ नाश्ते के लिए रख दिया | उस लड़के को देख कर उनकी पानी पीने की इच्छा भी जाती रही | अपना जातिगत संस्कार तो उन्हें रोक रहा था लेकिन दिखाने के लिए उन्होंने पानी को उठाकर मुह से लगाया | पी नहीं पाये तो उसे वापस मेज पर रख दिया | 
कुछ वक्ताओं के बोलने के बाद जैसे ही उनके व्याख्यान का नंबर आया , उन्होंने बड़े ही ओजस्वी भाषा में जाति व्यवस्था और धर्म के खिलाफ भाषण देना शुरू कर दिया | भाषण खत्म हुआ और लोगों के तमाम रोकने के बावजूद वहाँ से निकल लिए कि कहीं उनके साथ कुछ खाना , पीना न पड़ जाये |

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