एक ही स्कूल में कक्षा ८ में दोनों पढ़ते थे | सूरज अमीरघराने से ताल्लुकात रखता था, वहीं नीरज गरीब था ,फिर भी दोनों के आपसी सम्बन्ध काफी अच्छे थे | उन दोनों का हर कामसाथ-साथ होता था | एक दिन सूरज को गणित का कुछ सवाल नही आ रहा था ,तो नीरज ने कहा कि मेरे घर पर आ जाओ ,वही मिलकर पढाई कर लेते है| वे एक कमरे में पढाई करने लगे तभी अचानक नीरज कि माँ कमरे में आ गई ओर बोली "बचवा तू लोगन के जब भूख पियास लगी तब मांग के खा लीहा , गर्मी क दिन हौ ,पढ़े के समय भूख खूब लागेला | एके आपने घर समझिआ ""
इतना सुनते ही नीरज आगबबूला हो गया और माँ का हाथ पकड़कर कमरे से बाहर कर दिया और कहने लगा कि जब आपको खड़ी हिंदी में बोलने नही आता है तो आप मेरे दोस्तों से बात करने क्यों जाती है |
इतना सुनते ही नीरज आगबबूला हो गया और माँ का हाथ पकड़कर कमरे से बाहर कर दिया और कहने लगा कि जब आपको खड़ी हिंदी में बोलने नही आता है तो आप मेरे दोस्तों से बात करने क्यों जाती है |
No comments:
Post a Comment