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Saturday, April 26, 2014

गलती

कभी कभी समय हमें अपनी गलती सुधारने का मौका दे देता है और हम खुद की नजरों में अपनी इज़्ज़त बचा लेते हैं | कल ही कि बात है ,मैं ऑफिस के लिए लेट हो रहा था , इसलिए जल्दी में था | जैसे ही चौराहे पर पहुंचा , एक परेशान से दिखने वाले व्यक्ति ने मुझे रोक कर कुछ पूछना चाहा | मैं देख रहा था की वो कई लोगों से कुछ पूछ रहा है लेकिन हर आदमी बिना बताये आगे बढ़ जा रहा था | वो शायद कोई पता पूछ रहा था , लेकिन मैंने भी अपनी जल्दी के चलते उसको अनसुना किया और आगे बढ़ गया |
शाम को लौटते वक्त मैंने देखा कि चौराहे पर भीड़ लगी हुई है | जानने की उत्सुकता हुई कि माजरा क्या है , और मैं भी भीड़ में शामिल हो गया | एक आदमी सड़क पर घायल पड़ा हुआ था | किसी वाहन ने उसको टक्कर मार दिया था और सारे लोग तमाशबीन बने खड़े थे | शायद हर आदमी इस इंतजार में था कि कोई और इसे अस्पताल ले जाये | एक बार तो मैंने भी सोचा कि चलते हैं , जब कोई आगे नहीं आ रहा तो मैं क्यों पचड़े में पडूँ | लेकिन फिर सुबह की घटना दिमाग में आ गयी तो लगा जैसे इसकी मदद करके मैं सुबह की गलती को सुधार सकता हूँ | और मैंने घायल को अस्पताल लेजाने का निर्णय कर लिया | 

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