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Saturday, April 19, 2014

गाड़ी

अरे ओ साहबजादे , जरा देख के चलाया करो गाड़ी | सारा कपड़ा ख़राब कर दिया | कार पे क्या बैठ गए , पता नहीं क्या समझ लेते हैं अपने आप को |
कपड़ों पे पड़े छीटों को देख देख के मूड ख़राब हो गया उसका | आज बहुत दिन बाद वो पैदल मार्केट निकला था | घर आने पर श्रीमतीजी ने जब पूछा तो सारी भड़ास निकाल दी ये कहते हुए कि लोगों को तो सलीका ही नहीं रह गया गाड़ी चलाने का |
लेकिन अगले दिन ऑफिस में पहुँच कर अपने सहकर्मियों को हँसते हुए बता रहे थे कि आज तो मजा आ गया रास्ते में , एक गड्ढे में गाड़ी का पहिया चला गया और जो छीटें पड़ी लोगों के ऊपर कि होली की याद आ गयी |

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