होर रह --
अचानक मोड़ पर कार के सामने एक मोटरसाइकिल वाला आ गया और मैंने तेजी से ब्रेक लगाया | साथ ही साथ मेरे मुह से निकल गया "होर रह "|
जिंदगी में बहुत सारी घटनाएँ ऐसी होती हैं जिन्हें हम याद रखना चाहते हैं , बहुत सारी ऐसी भी होती है जिन्हे हम कतई याद नहीं रखना चाहते , लेकिन कुछ बातें ऐसी भी होती हैं जिनको हम याद तो नहीं रखते लेकिन वो हमारे अवचेतन मन में इस तरह समा जाती हैं की हम चाह कर भी उन्हें अपने से अलग नहीं कर सकते |
ये उस समय की बात है जब हम स्कूल में पढ़ते थे | घर से स्कूल लगभग ८ किमी दूर था और हम रोज साइकिल से स्कूल जाते थे | गांव से स्कूल का रास्ता कच्चा-पक्का था और बीच में खेत खलिहान भी पड़ते थे | हमारे एक मित्र जो की दूसरे गांव में रहते थे , वो भी अक्सर आते समय तो साथ आते थे , कभी कभी जाते समय भी मिल जाते थे | अपना रास्ता मस्ती में साइकिल चलाते , ठहाके लगाते और दुनिया जहान की बातें करते बीत जाता था | फिर हम लोग अपने अपने घर को निकल जाते थे | हमारे वो मित्र भी एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते थे और साल में लगभग 9 महीने स्कूल आने के पहले और स्कूल से जाने के बाद खेतों में काम करते थे | उस समय खेती में यंत्रीकरण की शुरुआत हो चुकी थी और हर गांव में दो या तीन ट्रेक्टर आ चुके थे | लेकिन अभी भी बहुत सारे किसानों के पास खेतों की जुताई करने के लिए बैल होते थे | हमारे मित्र के घर भी ट्रेक्टर नहीं था और उनके यहाँ भी जुताई बैलों से ही होती थी |
गांव में हल जोतते समय बैलों को चलने और रोकने के लिए अलग अलग शब्द इस्तेमाल होते थे और बैल इन शब्दों को सुनकर ही रुकते या चलते थे | इन्हीं में से एक शब्द थे "होर रह" जो बैलों को रुकने के लिए प्रयुक्त होता था | चूँकि हमारे मित्र लगातार जुताई करते रहते थे इसलिए ये शब्द उनकी जबान पर चढ़ा हुआ था | वो इसी शब्द का इस्तेमाल अपनी साइकिल को रोकने के लिए भी करते थे , साइकिल में ब्रेक लगाने के बाद | लगातार सुनते सुनते वो शब्द मेरे अवचेतन मन में भी छप गया और मैंने भी साइकिल रोकने के लिए यही शब्द इस्तेमाल करना शुरू कर दिया | फिर साइकिल से स्कूटर , मोटरसाइकिल और अब कार भी , लेकिन अब भी ब्रेक लगाने के समय गाहे बगाहे जबान पे आ ही जाता है "होर रह "|
अफ़सोस सिर्फ इसका है कि उस मित्र से स्कूल के बाद आज तक मुलाकात नहीं हुई | लेकिन शायद जब भी होगी , मैं जरूर पूछूंगा कि उनको याद है कि नहीं "होर रह "|
अचानक मोड़ पर कार के सामने एक मोटरसाइकिल वाला आ गया और मैंने तेजी से ब्रेक लगाया | साथ ही साथ मेरे मुह से निकल गया "होर रह "|
जिंदगी में बहुत सारी घटनाएँ ऐसी होती हैं जिन्हें हम याद रखना चाहते हैं , बहुत सारी ऐसी भी होती है जिन्हे हम कतई याद नहीं रखना चाहते , लेकिन कुछ बातें ऐसी भी होती हैं जिनको हम याद तो नहीं रखते लेकिन वो हमारे अवचेतन मन में इस तरह समा जाती हैं की हम चाह कर भी उन्हें अपने से अलग नहीं कर सकते |
ये उस समय की बात है जब हम स्कूल में पढ़ते थे | घर से स्कूल लगभग ८ किमी दूर था और हम रोज साइकिल से स्कूल जाते थे | गांव से स्कूल का रास्ता कच्चा-पक्का था और बीच में खेत खलिहान भी पड़ते थे | हमारे एक मित्र जो की दूसरे गांव में रहते थे , वो भी अक्सर आते समय तो साथ आते थे , कभी कभी जाते समय भी मिल जाते थे | अपना रास्ता मस्ती में साइकिल चलाते , ठहाके लगाते और दुनिया जहान की बातें करते बीत जाता था | फिर हम लोग अपने अपने घर को निकल जाते थे | हमारे वो मित्र भी एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते थे और साल में लगभग 9 महीने स्कूल आने के पहले और स्कूल से जाने के बाद खेतों में काम करते थे | उस समय खेती में यंत्रीकरण की शुरुआत हो चुकी थी और हर गांव में दो या तीन ट्रेक्टर आ चुके थे | लेकिन अभी भी बहुत सारे किसानों के पास खेतों की जुताई करने के लिए बैल होते थे | हमारे मित्र के घर भी ट्रेक्टर नहीं था और उनके यहाँ भी जुताई बैलों से ही होती थी |
गांव में हल जोतते समय बैलों को चलने और रोकने के लिए अलग अलग शब्द इस्तेमाल होते थे और बैल इन शब्दों को सुनकर ही रुकते या चलते थे | इन्हीं में से एक शब्द थे "होर रह" जो बैलों को रुकने के लिए प्रयुक्त होता था | चूँकि हमारे मित्र लगातार जुताई करते रहते थे इसलिए ये शब्द उनकी जबान पर चढ़ा हुआ था | वो इसी शब्द का इस्तेमाल अपनी साइकिल को रोकने के लिए भी करते थे , साइकिल में ब्रेक लगाने के बाद | लगातार सुनते सुनते वो शब्द मेरे अवचेतन मन में भी छप गया और मैंने भी साइकिल रोकने के लिए यही शब्द इस्तेमाल करना शुरू कर दिया | फिर साइकिल से स्कूटर , मोटरसाइकिल और अब कार भी , लेकिन अब भी ब्रेक लगाने के समय गाहे बगाहे जबान पे आ ही जाता है "होर रह "|
अफ़सोस सिर्फ इसका है कि उस मित्र से स्कूल के बाद आज तक मुलाकात नहीं हुई | लेकिन शायद जब भी होगी , मैं जरूर पूछूंगा कि उनको याद है कि नहीं "होर रह "|
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