आज तो जरूर कुछ न कुछ ले आऊंगा , सतई ने सोचा और निकल गया । आज दूसरा दिन था और घर में खाने को कुछ नहीं था । एक बार फिर वो गांव का चक्कर लगा आया , कहीं कोई काम नहीं मिला । हैरान , परेशान वो गांव के बाहर ऊसर की ओर चल पड़ा ।
अचानक उसे किसी की आवाज सुनाई दी , पलट के देखा तो प्रधान उसे बुला रहा था । जैसे ही वो नजदीक पहुंचा , प्रधान बोला " अरे सतई , मेरी गाय मर गयी है , उसे उठा लाओ और फेंक दो , और ये कहते हुए उसने एक 100 का नोट निकाल के पकड़ा दिया ।
सतई को तो मानो सब कुछ मिल गया , रुपये भी मिले और चमड़ा भी । उसके कान में कहीं सुना ये वाक्य गूंज रहा था " गाय हमारी माता है "और वो प्रधान के घर चल दिया |
अचानक उसे किसी की आवाज सुनाई दी , पलट के देखा तो प्रधान उसे बुला रहा था । जैसे ही वो नजदीक पहुंचा , प्रधान बोला " अरे सतई , मेरी गाय मर गयी है , उसे उठा लाओ और फेंक दो , और ये कहते हुए उसने एक 100 का नोट निकाल के पकड़ा दिया ।
सतई को तो मानो सब कुछ मिल गया , रुपये भी मिले और चमड़ा भी । उसके कान में कहीं सुना ये वाक्य गूंज रहा था " गाय हमारी माता है "और वो प्रधान के घर चल दिया |
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