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Saturday, August 16, 2014

झंडा--

" सारी तैयारी हो गयी न , सबको बता दिया कल सुबह जल्दी आने के लिए" | 
" यस सर", रवि ने कहा | पूरे ऑफिस को साफ किया गया था और पूरी तैयारी हो गयी थी |
रवि ने एक बार फिर सारा कुछ देखा , कहीं कोई कमी न रह जाये | बड़े साहब नए नए आये थे और वो कोई मौका नहीं छोड़ना चाहता था उनको इम्प्रेस करने का | पिछले वाले की तो कोई रूचि नहीं थी इसमें , लेकिन ये तो काफी उत्साहित थे | खैर , लड्डूओं का आर्डर हो गया था , समोसे भी आ जायेंगे और कोल्ड ड्रिंक भी |
अगले दिन सुबह सबसे पहले पहुँच गया ऑफिस | फटाफट भोला को दौड़ाया लड्डू और समोसे के लिए | स्टाफ आने लगा था और बड़े साहब कभी भी आ सकते थे | अचानक रवि को ध्यान आया कि झंडा तो निकाला ही नहीं , भाग के गया और अलमारी खोली | पूरी अलमारी ढूंढ डाली , लेकिन झंडा नहीं मिला | यहीं तो रहता था झंडा , अब कहा खोजे | इस समय तो खादी की दुकान भी नहीं खुली होगी | पसीना निकलने लगा था , कि अचानक भोला दिखा | रवि ने घबराये स्वर में पूछा " झंडा कहा है , मिल नहीं रहा " |
" साहब , झंडा मैंने प्रेस करा के रखा है , आज तो बिलकुल साफ सुथरा झंडा फहराना चाहिए न" , और उसने झंडा ला कर रख दिया | पता नहीं क्यूँ , रवि को लगा कि स्वतंत्रता दिवस मनाने का असली हक़ तो भोला को ही है |

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