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Thursday, August 28, 2014

दक्षिण अफ्रीका डायरी--

कल दक्षिण अफ्रीका प्रवास का एक वर्ष पूर्ण हुआ | कैसे बीत गया , पता ही नहीं चला | शायद अच्छे दिन ऐसे ही उड़ जाते हैं और पीछे मुड़ कर देखने नहीं देते | पिछले वर्ष जब आया था तो भयभीत था , सभी परिचितों ने और बैंक के भी लोगों ने काफी डरा दिया था कि बहुत खतरनाक जगह है , एकदम सुरक्षित नहीं है और सामाजिक जीवन तो ख़त्म ही हो जाने वाला है | लेकिन इस एक वर्ष ने इन सभी धारणाओं को न केवल निर्मूल साबित कर दिया , अपितु ये भी दिखा दिया कि यह देश बहुत जीवंत , सुरक्षित और खूबसूरत है |
कहीं भी निकल जाइए , सब तरफ हरियाली ही हरियाली | जोहानसबर्ग तो शायद दुनिया के प्रथम तीन सबसे हरे भरे शहरों में शुमार होता है | सामाजिक जीवन भी बेहतरीन है , हर हफ्ते शनिवार और रविवार को लोग जम के मौज मनाते हैं | इन दो दिनों में कही दूर निकल जाना और पिकनिक या पार्टी करना इनकी दिनचर्या में शामिल है |
थोड़ी असुरक्षा है यहाँ , लेकिन वो विश्व के किस भाग में नहीं है | बस थोड़ा सतर्क रहने कि जरुरत होती है यहाँ , देर रात्रि विचरण यहाँ थोड़ा असुरक्षित है , लेकिन नाईट लाइफ भी बढ़िया है यहाँ | सड़के शानदार , विद्युत व्यवस्था बहुत उम्दा और चारो ओर साफ और सुन्दर | लोग काफी सुसंस्कृत और मददगार | यहाँ से डरबन तक सब देख लिया , गाँधीजी का टॉलस्टॉय फार्म , पीटरमेरिटबर्ग स्टेशन जहाँ उनको ट्रेन के डब्बे से निकला गया था , और नेल्सन मंडेला का घर एवम कार्यस्थल | अब केपटाउन देखना है , यहाँ का सबसे खूबसूरत शहर |
अब थोड़ा अपने निवास स्थान के बारे में , जिस सोसाइटी में हम रहते हैं वहां कोई भी हिंदुस्तानी परिवार नहीं है | इससे यहाँ के लोगों के रहन सहन एवम संस्कृति के बारे में काफी जानने को मिला | एक पड़ोसी महिला है जो बुजुर्ग हैं और घर के बुजुर्ग की तरह ध्यान रखती हैं , इतना ध्यान की कभी कभी उकताहट भी होने लगती है , लेकिन फिर भी अच्छा लगता है | विशू जिस स्कूल में पढ़ते हैं , वहां कोई स्कूल बस नहीं जाती | यहीं एक और पड़ोसी हैं जिनके दो बच्चे हैं जो उसी स्कूल में पढ़ते हैं | शुरुआत में तो वो ही स्कूल ले जाते थे और ले भी आते थे लेकिन मेरे बहुत कहने सुनने के बाद हफ्ते में दो दिन मुझे इज़ाज़त दी कि मैं बच्चों को स्कूल छोड़ूँ | ले आने के लिए अधिकांशतया वो ही ले आते हैं | दिल जीत लिया है उन्होंने हमारा , कभी कभी तो उनके बच्चे नहीं भी जा रहे होते हैं तो भी विशू को अकेले ही ले जाते हैं | बहुत ही बेहतरीन इंसान , बिरले ही मिलते हैं ऐसे लोग |
यहाँ की एक प्रथा हैं कि आप किसी से भी मुखातिब होते हैं तो वो आपकी कुशलछेम जरूर पूछता है और आपसे भी उम्मीद की जाती हैं कि आप भी पूछें | शुरुवात में दिक्कत हुई लेकिन अब आदत पड़ गयी हैं , कोई भी हो , गार्ड , ड्राइवर , स्वीपर या ग्राहक , सबका कुशलछेम पूछना ही हैं | बिलकुल शांति पसंद लोग, लेकिन उतने ही संगीत और नृत्य प्रेमी |
कुल मिलाकर बड़ा सुखद अनुभव हैं यहाँ का और जो लोग भी अफ्रीका देखना चाहते हों वो यहाँ जरूर आएं | कुछ और बातें फिर कभी , लेकिन अपना देश तो शिद्दत से याद आता है |

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