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Sunday, August 3, 2014

नज़रिया--

" बड़ा ख़राब जमाना आ गया है, अब घर में विधर्मी नौकर रख लिया है, कौन खायेगा, पियेगा उसके घर"। राधा ऊँचे स्वर में अपने पड़ोसन को बता रही थी।
" अरे हमसे कहा होता, हमने दिला दिया होता नौकर, कोई कमी है इनकी ", पड़ोसन ने भी हाँ में हाँ मिलायी।
थोड़ी देर में ही बेटी से बात करते हुई राधा ने पूछा " अरे कोई काम वाली मिली की नहीं "।
" हाँ माँ, मिल गयी है, बहुत सफाई से काम करती है फातिमा "।
" देखना बेटा, संभाल के रखना, आज कल टिकते नहीं ये लोग, समझी "।

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