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Thursday, August 28, 2014

--आज़म खान की भैंसों की बातचीत--

" बाहर कितनी गर्मी थी न , और गन्दगी भी बहुत थी " | 
" लेकिन बड़ा सुकून है यहाँ " , मुस्कुराते हुए एक ने कहा | 
" हाँ , वो तो है , लेकिन कुछ दिन पहले तो अपनी भी हालत ख़राब थी " , दूसरी ने कहा | 
" किस्मत इसी को कहते हैं न " और सभी हँस पड़ीं |
थोड़ी देर बाद कुछ आदमी आये और इज़्ज़त से सबको बाहर ले गए | पानी के फव्वारे में सब स्नान करने लगीं |
एक तरफ खाने पीने के लिए तरह तरह के खाद्य पदार्थ थे , इत्र की खुशबु फैली हुई थी | खाने पीने के बाद सब आराम फरमाने लगीं |
सारे आदमी निगरानी में लगे हुए थे कि इन्हे कोई दिक्कत न होने पाये |
--आज़म खान की भैंसों की बातचीत--

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