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Saturday, August 30, 2014

वक़्त--

इंसानों की आवाज अब यहाँ नहीं आती थी | भयानक सन्नाटा फ़ैल गया था , कहीं कोई हलचल नहीं |
कभी ये जगह बहुत आबाद थी | चारो तरफ फैली हरियाली , उनके बीच ढेर सारे मकान और हर तरफ जीवन के निशान | यहाँ रहने वाले अपने जीवन से संतुष्ट और उन्हें मिलता था प्रकृति का भरपूर सानिध्य |
अचानक सीमा पार से गतिविधियाँ बढ़ गयीं , चिड़ियों के चहचहाने की जगह गोलियों की तड़तड़ाहट ने ले ली | जीवन के संगीत पर मौत का रुदन भारी पड़ गया | देखते ही देखते पूरा इलाका श्मशान में तब्दील हो गया | अब उजड़े हुए मकान , गुजरे हुए वक़्त की तरह बेजान पड़े थे , इस आशा में कि शायद फिर कभी हरियाली और जीवन का साथ हो यहाँ |

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