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Thursday, August 7, 2014

इज़्ज़त--

" ये सब छोड़ क्यों नहीं देती ", कपड़े पहनते हुए उसने कहा।
" एक नयी जिंदगी शुरू करो, इस गन्दगी से दूर, इज़्ज़त की जिंदगी "।
वो बिफर गयी, " ऐसा है, ऐसे भाषण देने वाले बहुत मिलते हैं, लेकिन कपड़े पहनने के बाद"।
" और ये काम मैं किसी के दबाव में नहीं करती, अपनी मर्ज़ी से करती हूँ और अच्छे पैसे मिल जाते हैं"। ये मुझे भी पता है ज्यादे दिन नहीं चलना है ये, इसीलिए भविष्य के लिए भी कमा लेना चाहती हूँ "।
फिर एक गहरी नज़र और डाली उसने और बोली, " एक बात और, इज़्ज़त जब तुम लोगों की नहीं जाती, तो मेरी क्यों जाएगी"।
अब उसकी ऑंखें मिलाने की भी हिम्मत नहीं थी, चुपचाप निकल गया| 

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