सबके चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ़ साफ़ दिख रही थी , चुनाव एकदम सर पर थे और कोई ठोस मुद्दा नहीं मिल रहा था उन लोगों को । कई प्रस्ताव दिए वहाँ मौजूद लोगों ने लेकिन सब सिरे से खारिज़ कर दिया रज्जब मियाँ ने ।
" काश , थोड़ा माहौल बिगाड़ पाते हम लोग तो हमारे पक्ष में लहर होती लेकिन अपने ही मोहल्ले के चचाजान सारा खेल ख़राब कर दे रहे हैं । अब उनको कौन समझाए की आज भाई चारा का समय नहीं रहा ", रज़्ज़ब मियाँ खौल रहे थे ।
" तो फिर क्या किया जाये , उनको समझाना तो नामुमकिन सी बात है । कुछ और सोचना होगा हमें "।
" समझा नहीं सकते तो क्या , खामोश तो कर सकते हैं न । और उनके शरीर को उन लोगों के इलाके में डाल देना , एक तीर से दो शिकार हो जायेंगे "।
अचानक वहाँ मौज़ूद लोगों के चेहरे तनावमुक्त नज़र आने लगे ।
" काश , थोड़ा माहौल बिगाड़ पाते हम लोग तो हमारे पक्ष में लहर होती लेकिन अपने ही मोहल्ले के चचाजान सारा खेल ख़राब कर दे रहे हैं । अब उनको कौन समझाए की आज भाई चारा का समय नहीं रहा ", रज़्ज़ब मियाँ खौल रहे थे ।
" तो फिर क्या किया जाये , उनको समझाना तो नामुमकिन सी बात है । कुछ और सोचना होगा हमें "।
" समझा नहीं सकते तो क्या , खामोश तो कर सकते हैं न । और उनके शरीर को उन लोगों के इलाके में डाल देना , एक तीर से दो शिकार हो जायेंगे "।
अचानक वहाँ मौज़ूद लोगों के चेहरे तनावमुक्त नज़र आने लगे ।
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