माँ की ही गोद का एहसास दिलाती है
बेटी मुझे आजकल कुछ ऐसे सुलाती है
बेटी मुझे आजकल कुछ ऐसे सुलाती है
कल तक हम समझे , कि है वो छोटी
आज कहकर बेटा, मुझको खिलाती है
आज कहकर बेटा, मुझको खिलाती है
वज़ह थी जीने की , जब थी वो बच्ची
आज अपने प्यार से हमको जिलाती है
आज अपने प्यार से हमको जिलाती है
थी पहचान उसकी , कभी नाम से मेरे
दुनियां हमें उसके ही नाम से बुलाती है
दुनियां हमें उसके ही नाम से बुलाती है
माँ की ही गोद का एहसास दिलाती है
बेटी मुझे आजकल कुछ ऐसे सुलाती है !!
बेटी मुझे आजकल कुछ ऐसे सुलाती है !!
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