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Friday, November 6, 2015

मोहब्बत--

बिगड़े हैं हालात अगरचे , फिर भी मुस्कुराते हैं
एक मोहब्बत का दीपक , आओ हम जलाते हैं
बना के हमको मोहरें , चाल चल रहे दूजे
वक़्त ने ली अब करवट , अदाकार बन जाते हैं
नफ़रत , हिंसा , ईर्ष्या , दिखतें हैं हर ओर
भाईचारा और प्यार का , इक बाजार बनाते हैं
बिगड़े हैं हालात अगरचे , फिर भी मुस्कुराते हैं
एक मोहब्बत का दीपक , आओ हम जलाते हैं !!

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