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Friday, November 6, 2015

समझ--

सुबह अखबार पढ़कर उसका खून खौल उठा | ये विधर्मी हमारे धर्म का सत्यनाश करने पर तुले हुए हैं , इनको सबक सिखाना जरुरी है | जिसे हम लोग माँ समान मानते हैं उसी की हत्या करना , अब बर्दाश्त नहीं किया जा सकता | लगातार इन्ही विचारों का मंथन चल रहा था उसके दिमाग में | 
" बेटा, मेरी आँख से बहुत कम दिखने लगा है आजकल , किसी डॉक्टर को दिखा लेते ", माँ की आवाज़ ने उसको जैसे ज़मीन पर ला पटका | पिछले कई हफ्ते से वो अपनी आँख के लिए कह रही थी और वो टालता जा रहा था | अचानक उसे अपने ऊपर शर्मिंदगी महसूस होने लगी कि ये क्या सोचने लगा है वो | 
" माँ , चलो तुमको आँख के डॉक्टर को दिखा देता हूँ | और आते समय एक बढ़िया सी साड़ी भी खरीद लेना अपने लिए ", कहते हुए वो उठ खड़ा हुआ | माँ ने उसकी ऑंखें खोल दी थीं , उसे इंसान और जानवर में फ़र्क़ समझ आ गया |

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