" अरे देखो तो , वो बुढ़िया के बाल बेचने वाला गिरा पड़ा है । चलकर पूछ लेते है कि क्या हुआ है "।
" बिना बात के पचड़े में क्यूँ फँसना , कहीं मर वर गया होगा तो मुसीबत में फँस जायेंगे ", पत्नी को झिड़कते हुए राजू ने बाइक आगे बढ़ा दी ।।
अपने ही मोहल्ले का लड़का था वो , जब भी घर की तरफ से निकलता था , बच्चे को यूँ ही पकड़ा देता था एक पैकेट । पैसे मिले या न मिले , हँसते हुए आगे बढ़ जाता । जब भी पैसे नहीं देने होते , अपने ही घर का बना देता था उसे राजू । वो भी उसे बहुत मानती थी और कभी कभी खाने पीने को कुछ दे देती थी । आज उसको यूँ छोड़ के आगे चल देना उसे दिल में कचोट रहा था ।
अचानक राजू ने बाइक रोकी और उसकी निगाह सड़क के किनारे वाले पेड़ पर बैठे गिरगिट पर चली गयी । उसे अपने पति के पीठ का रंग भी बदलता महसूस हो रहा था ।
" बिना बात के पचड़े में क्यूँ फँसना , कहीं मर वर गया होगा तो मुसीबत में फँस जायेंगे ", पत्नी को झिड़कते हुए राजू ने बाइक आगे बढ़ा दी ।।
अपने ही मोहल्ले का लड़का था वो , जब भी घर की तरफ से निकलता था , बच्चे को यूँ ही पकड़ा देता था एक पैकेट । पैसे मिले या न मिले , हँसते हुए आगे बढ़ जाता । जब भी पैसे नहीं देने होते , अपने ही घर का बना देता था उसे राजू । वो भी उसे बहुत मानती थी और कभी कभी खाने पीने को कुछ दे देती थी । आज उसको यूँ छोड़ के आगे चल देना उसे दिल में कचोट रहा था ।
अचानक राजू ने बाइक रोकी और उसकी निगाह सड़क के किनारे वाले पेड़ पर बैठे गिरगिट पर चली गयी । उसे अपने पति के पीठ का रंग भी बदलता महसूस हो रहा था ।
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