" इस लड़की को आप नहीं रख सकते कॉलेज में , हमारे बच्चों पर बुरा असर पड़ेगा ", अभिभावकों की भीड़ इकठ्ठा हो गयी थी कॉलेज के गेट पर और आवाज़ें बढ़ने लगी थीं । पिछले महीने ही कुछ दरिंदों ने उसकी अस्मत लूट ली थी और उस समय पूरा कॉलेज प्रशासन उसको निकालने के पक्ष में था लेकिन प्रिंसिपल अडिग थे अपने फैसले पर ।
" अगर यही हादसा आपके बच्ची के साथ हुआ होता तो भी आपलोग यही कहते । इस हादसे में उसका क्या कसूर था , यही न कि वो अपनी रक्षा खुद करने में असमर्थ थी । आप लोग देखना चाहेंगे कि वो क्या कर रही है यहाँ ", कहकर वो खेल के मैदान की तरफ चल पड़े ।
मैदान का दृश्य देखकर सबकी ऑंखें फटी रह गयी । वही लड़की जो कभी खुद की रक्षा नहीं कर पायी थी , आज बाकी लड़कियों को आत्मरक्षा का पाठ पढ़ा रही थी । एक बार फिर से आवाजें शुरू हो गयी थीं , लोगों की तालियों की ।
" अगर यही हादसा आपके बच्ची के साथ हुआ होता तो भी आपलोग यही कहते । इस हादसे में उसका क्या कसूर था , यही न कि वो अपनी रक्षा खुद करने में असमर्थ थी । आप लोग देखना चाहेंगे कि वो क्या कर रही है यहाँ ", कहकर वो खेल के मैदान की तरफ चल पड़े ।
मैदान का दृश्य देखकर सबकी ऑंखें फटी रह गयी । वही लड़की जो कभी खुद की रक्षा नहीं कर पायी थी , आज बाकी लड़कियों को आत्मरक्षा का पाठ पढ़ा रही थी । एक बार फिर से आवाजें शुरू हो गयी थीं , लोगों की तालियों की ।
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