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Wednesday, January 6, 2016

मार्गदर्शन-

आज एक बार फिर उनका कोचिंग संस्थान सुर्ख़ियों में था , बहुत से बच्चे हालिया संपन्न प्रतियोगिता परीक्षा में सफल हुए थे | कई बच्चों के अभिभावक इकट्ठा थे और उनको दिल से धन्यवाद दे रहे थे | बच्चे भी नतमस्तक थे उनके समर्पण और मार्गदर्शन से क्योंकि किस बच्चे को किस तरह की तैयारी करानी है , ये उनको बखूबी पता था |
एक बेहद गरीब बच्चे के पिता ने उनका हाथ पकड़ा और उसकी आँखों से आंसू बह निकले " आपका ये एहसान हम जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे , हम तो सपने में भी नहीं सोच सकते थे कि हमारा बच्चा भी कुछ बन पायेगा लेकिन !"|
" अरे , शिक्षक का तो फ़र्ज़ है बच्चों को उनकी मंज़िल तक पहुँचाना ", और मुस्कुरा कर उन्होंने हाथ जोड़ दिया |
दूसरे शहर में पढ़ते अपने बेटे को तो ड्रग्स से नहीं बचा पाये थे | इसलिए अंतिम सांस तक बच्चों को सही मार्गदर्शन देकर मंज़िल तक पहुँचाना ही अब उनका प्रायश्चित था |

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