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Wednesday, January 6, 2016

नयी कोंपल--

सुबह वो जैसे ही बाहर निकला , पिताजी को बगीचे की घास साफ़ करते देख दंग रह गया | ये क्या हो गया उनको , अच्छे भले तो घर में रहते हैं और किसी काम को करने के लिए कहा भी नहीं जाता उनको , फिर ये अचानक क्या हुआ |
" पापा , क्या कर रहे हैं आप , किसने कहा आपको ये सब करने को | ६० साल तक तो आपने खूब काम किया , अब तो आपके आराम करने के दिन हैं , लाईये दीजिये इसे ", कहते हुए उसने उनके हाथ से खुरपा ले लिया |
" मुझे किसी ने नहीं कहा लेकिन मुझे खुद लग रहा था कि मैं अनुपयोगी होता जा रहा हूँ | बाहर जाने नहीं देते कि कहीं गिर पड़ न जाऊँ, कोई काम करने नहीं देते तुम लोग , और सब्जी तक नहीं लाने देते कि लोग क्या कहेंगे "|
" अगर ऐसी बात है तो आज से ही इस गार्डन की जिम्मेदारी आपकी , आप जो करना चाहें , कीजिये यहाँ "|
बगीचे के फूलों से कम नहीं लग रही थी पापा के चेहरे की मुस्कान , उसे लगा जैसे बगीचे के किनारे वाले बूढ़े पेड़ पर नयी कोंपलें आ गयी हैं |

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