जैसे ही वो घर में घुसा , पत्नी का तमतमाया चेहरा देख कर समझ गया कि आज भी बाबूजी ने कुछ गड़बड़ किया है। कितनी बार उसको समझा चुका है कि अब उनकी उम्र काफी हो गयी है और ऐसे में उनका अपने ऊपर काबू नहीं रहता, लेकिन वो समझती ही नहीं। उसे देखते ही उसने ऊँची आवाज़ में चिल्लाना शुरू कर दिया जिसे अनसुना करके वो सीधे बाबूजी के कमरे में घुस गया। उम्मीद के अनुरूप ही उनका बिस्तर गीला था और वो लाचारी से उसकी तरफ देख रहे थे। उसने सहारा देकर उनको कुर्सी पर बैठाया और चद्दर उतारकर नया चद्दर बिछा दिया।
बाबूजी को वापस लिटाकर वो बेडरूम में गया और कपड़े बदल रहा था कि बच्चे के रोने से उसका ध्यान बंट गया। उसने भी कपड़ा गीला कर दिया था और उसे दिक्क़त महसूस हो रही थी। अचानक उसने बच्चे पर जोर जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया, पत्नी भागते हुए अंदर आई और उस पर भड़क गयी।
" क्या हो गया है तुमको, इतना भी नहीं सोचते कि वो बच्चा है और उसे कुछ समझ नहीं आता अभी ", और उसने बच्चे को उठाकर सीने से लगा लिया।
उसने पत्नी की तरफ देखते हुए शांत स्वर में कहा " बाबूजी को भी अब समझ में नहीं आता है ", और बाहर निकल गया।
बाबूजी को वापस लिटाकर वो बेडरूम में गया और कपड़े बदल रहा था कि बच्चे के रोने से उसका ध्यान बंट गया। उसने भी कपड़ा गीला कर दिया था और उसे दिक्क़त महसूस हो रही थी। अचानक उसने बच्चे पर जोर जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया, पत्नी भागते हुए अंदर आई और उस पर भड़क गयी।
" क्या हो गया है तुमको, इतना भी नहीं सोचते कि वो बच्चा है और उसे कुछ समझ नहीं आता अभी ", और उसने बच्चे को उठाकर सीने से लगा लिया।
उसने पत्नी की तरफ देखते हुए शांत स्वर में कहा " बाबूजी को भी अब समझ में नहीं आता है ", और बाहर निकल गया।
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