जेल से बाहर निकलते ही पुरानी बातें जेहन में ताज़ा हो गयीं । एक एक से गिन गिन के बदला लेगा और खासकर अपने उस पड़ोसी रहमत को तो किसी हाल में जिन्दा नहीं छोड़ेगा । आखिर उसी की गवाही पर तो जेल हुई थी नहीं तो मज़ाल थी किसी और की उसके ख़िलाफ़ जाने की । उस दंगों के माहौल में तो उसे सारे विधर्मी ही जान के दुश्मन दिखाई देते थे और जेल के ५ सालों में भी यही सब सीखता रहा था वो ।
अपने पुराने जरायम के दिनों के साथी के यहाँ से उसने हथियार लिया और चल पड़ा अपने पुराने मोहल्ले की ओर । लेकिन ये जगह तो कुछ और ही लग रही थी , एक स्कूल खुल गया था उस जगह जहाँ उसने आगजनी की थी और फिर उसकी निगाह पड़ी उस बच्ची पर जो एक बुज़ुर्ग को पानी पिला रही थी । जैसे जैसे उस बच्ची के बोतल से पानी उन बुज़ुर्ग की बोतल में गिर रहा था , वैसे वैसे उसकी नफ़रत की आग पर पानी पड़ रहा था । उसकी पकड़ हथियार पर ढीली पड़ गयी , एक बच्चे का निश्छल प्यार उसकी नफ़रत पर कई गुना भारी पड़ गया था ।
अपने पुराने जरायम के दिनों के साथी के यहाँ से उसने हथियार लिया और चल पड़ा अपने पुराने मोहल्ले की ओर । लेकिन ये जगह तो कुछ और ही लग रही थी , एक स्कूल खुल गया था उस जगह जहाँ उसने आगजनी की थी और फिर उसकी निगाह पड़ी उस बच्ची पर जो एक बुज़ुर्ग को पानी पिला रही थी । जैसे जैसे उस बच्ची के बोतल से पानी उन बुज़ुर्ग की बोतल में गिर रहा था , वैसे वैसे उसकी नफ़रत की आग पर पानी पड़ रहा था । उसकी पकड़ हथियार पर ढीली पड़ गयी , एक बच्चे का निश्छल प्यार उसकी नफ़रत पर कई गुना भारी पड़ गया था ।
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