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Wednesday, January 6, 2016

सुकून--

" तू आ गया मेरा बच्चा ", कांपते हांथों और धुंधलाई आँखों से देखते हुए माँ के हाथ उसके चेहरे पर घूम रहे थे | अचानक उसकी आँखों से टपकी बूँद माँ के हथेली पर पड़ी और माँ ने उसकी आँख पोंछ दी |
" रोते नहीं मेरे बच्चे , तू आ गया , अब मुझे चैन की सांस मिली | अब सुकून से तेरे पापा के पास जा पाऊँगी ", कहते हुए माँ ने एक बार फिर अपना हाथ उसके सर पर फेर दिया | पता नहीं कितनी देर तक उसने माँ का हाँथ अपने हांथों में थामे रखा , उसके अश्क़ माँ का दामन भिगोते रहे | अपना पिछला जीवन उसकी सोच में गुजरता गया , सब कुछ तो पा लिया था उसने, बढ़िया नौकरी , खुशहाल परिवार , लोगों की रेलपेल और प्रदूषण से मुक्त ये नया देश | फिर भी एक कमी सी क्यूँ हमेशा रहती थी उसके अंदर, आज माँ के हाथ जैसे उसे बता रहे थे | माँ के हाँथ तो हमेशा थे उसके सर पर लेकिन उसके हाँथ नहीं थे माँ के हांथों में |
उसने गौर से माँ के चेहरे को देखा, वो कितनी संतुष्ट दिखाई दे रही थी | आखिर उसके पापा के पास जाते समय अपने बच्चे का हाथ जो था उसके हाथों में |

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