" क्या ख़ाक बराबरी करोगी तुम नारियाँ हम पुरुषों की, हम हर मामले में तुमसे बीस हैं ", पुरुष के अहम ने ललकारते हुए कहा।
" अभी भी तुम यही कहोगे, मान क्यूँ नहीं लेते कि हम न सिर्फ तुमसे बराबरी पर हैं, बल्कि कई मामलों में तुमसे श्रेष्ठ भी हैं", नारी के शान्त मन ने जवाब दिया।
" अच्छा, जरा बताना कि तुम किस मामले में हमारे बराबर हो ?, पुरुष का अहम अभी भी गुरुर से भरा हुआ था।
" किस क्षेत्र में हम तुम्हारे बराबर नहीं हैं, हर मामले में तुमसे कंधे से कन्धा मिलाकर चलते है। और तुम्हे जन्म देकर पुरुष बनाने वाले भी तो हम ही हैं।"
" बराबरी के लिए तो तुमको आठ हाथों वाला अवतार लेना पड़ता है", व्यंग से पुरुष के अहम ने कहा।
" या तो तुम्हे दिखता नहीं और या तो तुम देखना ही नहीं चाहते। हमारे ये दो हाथ ही तुम्हारे आठ हाथ के बराबर हैं, लेकिन इसे मानने के बदले तुमने हमें ही आठ हाथ वाला बना दिया", नारी का मन अभी भी शांत था।
पुरुष के अहम को बात समझ में आ गयी, उसने धीरे से अपने दोनों हाथ नारी के आठ हाथों के सामने जोड़ दिए। अब उसे नारी के भी सिर्फ दो ही हाथ नज़र आ रहे थे जो उसके दो हाथों के समान थे।
" अभी भी तुम यही कहोगे, मान क्यूँ नहीं लेते कि हम न सिर्फ तुमसे बराबरी पर हैं, बल्कि कई मामलों में तुमसे श्रेष्ठ भी हैं", नारी के शान्त मन ने जवाब दिया।
" अच्छा, जरा बताना कि तुम किस मामले में हमारे बराबर हो ?, पुरुष का अहम अभी भी गुरुर से भरा हुआ था।
" किस क्षेत्र में हम तुम्हारे बराबर नहीं हैं, हर मामले में तुमसे कंधे से कन्धा मिलाकर चलते है। और तुम्हे जन्म देकर पुरुष बनाने वाले भी तो हम ही हैं।"
" बराबरी के लिए तो तुमको आठ हाथों वाला अवतार लेना पड़ता है", व्यंग से पुरुष के अहम ने कहा।
" या तो तुम्हे दिखता नहीं और या तो तुम देखना ही नहीं चाहते। हमारे ये दो हाथ ही तुम्हारे आठ हाथ के बराबर हैं, लेकिन इसे मानने के बदले तुमने हमें ही आठ हाथ वाला बना दिया", नारी का मन अभी भी शांत था।
पुरुष के अहम को बात समझ में आ गयी, उसने धीरे से अपने दोनों हाथ नारी के आठ हाथों के सामने जोड़ दिए। अब उसे नारी के भी सिर्फ दो ही हाथ नज़र आ रहे थे जो उसके दो हाथों के समान थे।
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